Submitted by Admin-team on 3 January, 2009 - 00:58
| शीर्षक | प्रतिसाद |
|---|---|
| केशवा का रे या (विडंबन) जागोमोहनप्यारे | 8 |
| आज वाटेतच रंग उधळतो टपोरी सूर्यकांत डोळसे | 3 |
| झेंडा .... देवनिनाद | 1 |
| नालायक राज्यकर्त्यांनो (ए मेरे वतन के लोगो) वैभ्या | 6 |
| दमछाक..!! अभय आर्वीकर | 1 |
| अतिरेकी पोसता पोसता काय गत झाली ! सूर्यकांत डोळसे | 2 |
| दिवस असे की, कंपनी माझी नाही... shashank pratapwar | 15 |
| अलंकार होता होता , साखळीच झाली ... shashank pratapwar | 7 |
| ज्यांना मराठी समजते फक्त त्यांच्या साठीच... श्रीकांत | 14 |
| ये गं हिरा, ये गं हिरा........ kalpana_053 | 4 |
| जेंव्हा तुझ्या बुटांना Chakrapani | 8 |
| डोम्या म्हणे..... चलो पुणे.... कौतुक शिरोडकर | 17 |
| डोम्या म्हणे .... तो मी नव्हेच ! कौतुक शिरोडकर | 24 |
| का करिता मम द्वेष? kalpana_053 | |
| डोम्या म्हणे........ कौतुक शिरोडकर | 29 |