ये कुछ आधे अधुरे पन्ने है

ये कुछ आधे अधुरे पन्ने है - पन्ना २०

Submitted by स्वप्ना_राज on 11 October, 2018 - 08:05

उम्रने तलाशी ली तो जेबोंसे लम्हे बरामद हुए
कुछ गमके, कुछ नम थे, कुछ टूटे
बस कुछ सही सलामत मिले
जो बचपनके थे

ये कुछ आधे अधुरे पन्ने है - पन्ना १९

Submitted by स्वप्ना_राज on 20 April, 2018 - 04:01

इतना क्यो सिखाये जा रही हो जिंदगी
हमे कौनसी सदियां गुजारनी है यहा

ये कुछ आधे अधुरे पन्ने है - पन्ना १७

Submitted by स्वप्ना_राज on 26 October, 2016 - 00:45

लम्हों की खुली किताब है जिंदगी
खयालों और सासोंका हिसाब है जिंदगी
कुछ जरुरते पूरी, कुछ ख्वाहिशें अधुरी
इन्ही सवालोंके जवाब है जिंदगी

ये कुछ आधे अधुरे पन्ने है - पन्ना १४

Submitted by स्वप्ना_राज on 29 November, 2012 - 01:09

बृच्छ जो धुंडे बीजको, बीज बृच्छके माही
जीव जो धुंडे पीवको, पीव जीवके माही

ये कुछ आधे अधुरे पन्ने है - पन्ना 13

Submitted by स्वप्ना_राज on 12 March, 2012 - 03:59

फिर किसी शाखने फेकी छाव
फिर किसी शाखने हाथ हिलाया
फिर किसी मोडसे उलझे पाव
फिर किसी राहने पास बुलाया

गुलमोहर: 
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