मणिपूर : केंद्र सरकारने उचलले कडक पाऊल. धन्यवाद मोदीजी.

Submitted by अलीबाबा on 20 July, 2023 - 01:16

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डबल इंजिन सरकार असलेल्या मणीपुरातला कुकी महिलांवरील अघोरी अत्याचारांचा व्हिडिओ आल्यानंतर मोदी सरकार खडबडून जागे झाले असून कडक पाऊले उचलली आहेत.

१. मणिपूरी महिलांच्या परिस्थितींवर भाष्य करणार्‍या सोशल मिडियावर होणार कारवाई.
२. सोशल मिडियावरून व्हिडीओ हटवण्याची कारवाई सुरू.

यापूर्वीही या प्रकारची कठोर पाऊल केंद्राने उचलली आहेत जसे:

जोशीमठाबद्दलच्या बातम्या बंद करणे.

चीनच्या आक्रमणाचा उल्लेख बंद करणे.

***

सरकारच्या धाडसी निर्णयाचे अभिनंदन

तुम्हा सर्वांच्या शिखंडीकरणाबदल तुमचे ही अभिनंदन!

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धाग्याला बंगाली वळण देण्यात फुरोगामी यशस्वी झालेले दिसत आहेत. त्यांनी फेकलेल्या जाळ्यात लोक अलगद फसत आहेत. हाच खरा प्रॉब्लेम आहे.

आज ही पोस्ट whatsapp वर आली.

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लेख बड़ा हैं लेकिन मणिपुर समस्या की जड़ें जानने की इच्छा है तो पढ़ें

वो लोग जो मणिपुर का रास्ता नहीं जानते। पूर्वोत्तर के राज्यों की राजधानी शायद जानते हो लेकिन कोई दूसरे शहर का नाम तक नहीं बता सकते उनके ज्ञान वर्धन के लिए बता दूं

"मणिपुर समस्या: एक इतिहास"

जब अंग्रेज भारत आए तो उन्होंने पूर्वोत्तर की ओर भी कदम बढ़ाए जहाँ उनको चाय के साथ तेल मिला। उनको इस पर डाका डालना था। उन्होंने वहां पाया कि यहाँ के लोग बहुत सीधे सरल हैं और ये लोग वैष्णव सनातनी हैं। परन्तु जंगल और पहाड़ों में रहने वाले ये लोग पूरे देश के अन्य भाग से अलग हैं तथा इन सीधे सादे लोगों के पास बहुमूल्य सम्पदा है।

अतः अंग्रेज़ों ने सबसे पहले यहाँ के लोगों को देश के अन्य भूभाग से पूरी तरह काटने को सोचा। इसके लिए अंग्रेज लोग ले आए इनर परमिट और आउटर परमिट की व्यवस्था। इसके अंतर्गत कोई भी इस इलाके में आने से पहले परमिट बनवाएगा और एक समय सीमा से आगे नहीं रह सकता। परन्तु इसके उलट अंग्रेजों ने अपने भवन बनवाए और अंग्रेज अफसरों को रखा जो चाय की पत्ती उगाने और उसको बेचने का काम करते थे।

इसके साथ अंग्रेज़ों ने देखा कि इस इलाके में ईसाई नहीं हैं। अतः इन्होने ईसाई मिशनरी को उठा उठा के यहां भेजा। मिशनरीयों ने इस इलाके के लोगों का आसानी से धर्म परिवर्तित करने का काम शुरू किया। जब खूब लोग ईसाई में परिवर्तित हो गए तो अंग्रेज इनको ईसाई राज्य बनाने का सपना दिखाने लगे। साथ ही उनका आशय था कि पूर्वोत्तर से चीन, भारत तथा पूर्वी एशिया पर नजर बना के रखेंगे।

अंग्रेज़ों ने एक चाल और चली। उन्होंने धर्म परिवर्तित करके ईसाई बने लोगों को ST का दर्जा दिया तथा उनको कई सरकारी सुविधाएं दी।

धर्म परिवर्तित करने वालों को कुकी जनजाति और वैष्णव लोगों को मैती समाज कहा जाता है।

तब इतने अलग राज्य नहीं थे और बहुत सरे नगा लोग भी धर्म परिवर्तित करके ईसाई बन गए। धीरे धीरे ईसाई पंथ को मानने वालों की संख्या वैष्णव लोगों से अधिक या बराबर हो गयी। मूल लोग सदा अंग्रेजों से लड़ते रहे जिसके कारण अंग्रेज इस इलाके का भारत से विभाजन करने में नाकाम रहे। परन्तु वो मैती हिंदुओं की संख्या कम करने और परिवर्तित लोगों को अधिक करने में कामयाब रहे। मणिपुर के 90% भूभाग पर कुकी और नगा का कब्जा हो गया जबकि 10% पर ही मैती रह गए। अंग्रेजों ने इस इलाके में अफीम की खेती को भी बढ़ावा दिया और उस पर ईसाई कुकी लोगों को कब्जा करने दिया।

आज़ादी के बाद:

आज़ादी के समय वहां के राजा थे बोध चंद्र सिंह और उन्होंने भारत में विलय का निर्णय किया। 1949 में उन्होंने नेहरू को बोला कि मूल वैष्णव जो कि 10% भूभाग में रह गए है उनको ST का दर्जा दिया जाए। नेहरू ने उनको जाने को कह दिया। फिर 1950 में संविधान अस्तित्व में आया तो नेहरू ने मैती समाज को कोई छूट नहीं दिया। 1960 में नेहरू सरकार द्वारा लैंड रिफार्म एक्ट लाया जिसमे 90% भूभाग वाले कुकी और नगा ईसाईयों को ST में डाल दिया गया। इस एक्ट में ये प्रावधान भी था जिसमे 90% कुकी - नगा वाले कहीं भी जा सकते हैं, रह सकते हैं और जमीन खरीद सकते हैं परन्तु 10% के इलाके में रहने वाले मैती हिंदुओं को ये सब अधिकार नहीं था। यहीं से मैती लोगों का दिल्ली से विरोध शुरू हो गया। नेहरू एक बार भी पूर्वोत्तर के हालत को ठीक करने करने नहीं गए।

उधर ब्रिटैन की MI6 और पाकिस्तान की ISI मिलकर कुकी और नगा को हथियार देने लगी जिसका उपयोग वो भारत विरुद्ध तथा मैती वैष्णवों को भागने के लिए करते थे। मैतियो ने उनका जम कर बिना दिल्ली के समर्थन के मुकाबला किया। सदा से इस इलाके में कांग्रेस और कम्युनिस्ट लोगों की सरकार रही और वो कुकी तथा नगा ईसाईयों के समर्थन में रहे। चूँकि लड़ाई पूर्वोत्तर में ट्राइबल जनजातियों के अपने अस्तित्व की थी तो अलग अलग फ्रंट बनाकर सबने हथियार उठा लिया। पूरा पूर्वोत्तर ISI के द्वारा एक लड़ाई का मैदान बना दिया गया। जिसके कारण Mizo जनजातियों में सशत्र विद्रोह शुरू हुआ। बिन दिल्ली के समर्थन जनजातियों ने ISI समर्थित कुकी, नगा और म्यांमार से भारत में अनधिकृत रूप से आये चिन जनजातियों से लड़ाई करते रहे। जानकारी के लिए बताते चलें कि कांग्रेस और कम्युनिस्ट ने मिशनरी के साथ मिलकर म्यांमार से आये इन चिन जनजातियों को मणिपुर के पहाड़ी इलाकों और जंगलों की नागरिकता देकर बसा दिया। ये चिन लोग ISI के पाले कुकी तथा नगा ईसाईयों के समर्थक थे तथा वैष्णव मैतियों से लड़ते थे। पूर्वोत्तर का हाल ख़राब था जिसका पोलिटिकल सलूशन नहीं निकाला गया और एक दिन इन्दिरा गाँधी ने आदिवासी इलाकों में air strike का आर्डर दे दिया जिसका आर्मी तथा वायुसेना ने विरोध किया परन्तु राजेश पायलट तथा सुरेश कलमाड़ी ने एयर स्ट्राइक किया और अपने लोगों की जाने ली। इसके बाद विद्रोह और खूनी तथा सशत्र हो गया।

1971 में पाकिस्तान विभाजन और बांग्ला देश अस्तित्व आने से ISI के एक्शन को झटका लगा परन्तु म्यांमार उसका एक खुला एरिया था। उसने म्यांमार के चिन लोगों का मणिपुर में एंट्री कराया जिसका कांग्रेस तथा उधर म्यांमार के अवैध चिन लोगों ने जंगलों में डेरा बनाया और वहां ओपियम यानि अफीम की खेती शुरू कर दिया। पूर्वोत्तर के राज्य मणिपुर, मिजोरम और नागालैंड दशकों तक कुकियों और चिन लोगों के अफीम की खेती तथा तस्करी का खुला खेल का मैदान बन गया। मयंमार से ISI तथा MI6 ने इस अफीम की तस्करी के साथ हथियारों की तस्करी का एक पूरा इकॉनमी खड़ा कर दिया। जिसके कारण पूर्वोत्तर के इन राज्यों की बड़ा जनसँख्या नशे की भी आदि हो गई। नशे के साथ हथियार उठाकर भारत के विरुद्ध युद्ध फलता फूलता रहा।

2014 के बाद की परिस्थिति:

मोदी सरकार ने एक्ट ईस्ट पालिसी के अंतर्गत पूर्वोत्तर पर ध्यान देना शुरू किया, NSCN - तथा भारत सरकार के बीच हुए "नागा एकॉर्ड" के बाद हिंसा में कमी आई। भारत की सेना पर आक्रमण बंद हुए। भारत सरकार ने अभूतपूर्व विकास किया जिससे वहां के लोगों को दिल्ली के करीब आने का मौका मिला। धीरे धीरे पूर्वोत्तर से हथियार आंदोलन समाप्त हुए। भारत के प्रति यहाँ के लोगों का दुराव कम हुआ। रणनीति के अंतर्गत पूर्वोत्तर में भाजपा की सरकार आई। वहां से कांग्रेस और कम्युनिस्ट का लगभग समापन हुआ। इसके कारण इन पार्टियों का एक प्रमुख धन का श्रोत जो कि अफीम तथा हथियारों की तस्करी था वो चला गया। इसके कारण इन लोगों के लिए किसी भी तरह पूर्वोत्तर में हिंसा और अशांति फैलाना जरूरी हो गया था। जिसका ये लोग बहुत समय से इंतजार कर रहे थे।

हाल ही में दो घटनाए घटीं:

1. मणिपुर उच्च न्यायालय ने फैसला किया कि अब मैती जनजाति को ST का स्टेटस मिलेगा। इसका परिणाम ये होगा कि नेहरू के बनाए फार्मूला का अंत हो जाएगा जिससे मैती लोग भी 10% के सिकुड़े हुए भूभाग की जगह पर पूरे मणिपुर में कहीं भी रह, बस और जमीन ले सकेंगे। ये कुकी और नगा को मंजूर नहीं।

2. मणिपुर के मुख्यमंत्री बिरेन सिंह ने कहा कि सरकार पहचान करके म्यांमार से आए अवैद्य चिन लोगों को बाहर निकलेगी और अफीम की खेती को समाप्त करेगी। इसके कारण तस्करों का गैंग सदमे में आ गया।

इसके बाद ईसाई कुकियों और ईसाई नगाओं ने अपने दिल्ली बैठे आकाओं, कम्युनिस्ट लुटियन मीडिया को जागृत किया। पहले इन लोगों ने अख़बारों और मैगजीन में गलत लेख लिखकर और उलटी जानकारी देकर शेष भारत के लोगों को बरगलाने का काम शुरू किया। उसके बाद दिल्ली से सिग्नल मिलते ही ईसाई कुकियों और ईसाई नगाओं ने मैती वैष्णव लोगों पर हमला बोल दिया। जिसका जवाब मैतियों दुगुना वेग से दिया और इन लोगों को बुरी तरह कुचल दिया जो कि कुकी - नगा के साथ दिल्ली में बैठे इनके आकाओं के लिए भी unexpected था। लात खाने के बाद ये लोग अदातानुसार विक्टम कार्ड खेलकर रोने लगे।

अभी भारत की मीडिया का एक वर्ग जो कम्युनिस्ट तथा कोंग्रस का प्रवक्ता है अब रोएगा क्योंकि पूर्वतर में मिशनरी, अवैध घुसपैठियों और तस्करों के बिल में मणिपुर तथा केंद्र सरकार ने खौलता तेल डाल दिया है।

केशावकूल हो तसेच असावे
पाठवणारा कट्टर भाजप समर्थक होता.
मी अश्या पोस्ट वर विश्वास ठेवत नाही. इथे चर्चेला म्हणून टाकलीय.

बाकी मला राजकारणातले काही कळत नाही. इतिहासाचा सुद्धा काही अभ्यास नाही. पण जे आज घडतेय ते फार संतापजनक, मानवतेला काळीमा फासणारे आणि एक देश म्हणून आपले किती मोठे फेल्युअर आहे हे कळते. त्यासाठी खोलात जायची गरज नाही..

धाग्याला बंगाली वळण देण्यात फुरोगामी यशस्वी झालेले दिसत आहेत. त्यांनी फेकलेल्या जाळ्यात लोक अलगद फसत आहेत. हाच खरा प्रॉब्लेम आहे. >>>>>>
मोठ्ठा गैरसमज आणि संकुचित दृष्टीकोन ठेवण्यात काय हशील ?
मणिपूर असू द्या , की बंगाल , की राजस्थान !
मोठा प्रगल्भ विचार प्रदर्शित करत वर कोणी तरी म्हटलंय की
जगाच्या पाठीवर कोठेही परस्पर विरोधी गटाकडून फक्त महिलांनाच टार्गेट केलं जाते .
मग या धाग्यावर फक्त मणिपूर घटने बद्दळ बोलण्याचा आग्रह का ?

फुरोगामी
कारण हा धागा मणिपूर बद्दल आहे.
ह्या न्यायाने उद्या तुम्ही सीता हरण, महाभारतातले द्रौपदी वस्त्रहरण इत्यादी विषयांवरही इथेच चर्चा कराल.
तुम्ही बंगाल वर स्वतंत्र धागा काढा की.

बोलायची तर कोणत्याच विषयावर गरज नाही.
सरकार नी लगेच कारवाई करून रिझल्ट द्यावा.

सरकार कारवाई करत नाही म्हणून बोलावे लागते.
पुरोगामी तुम्हाला वाटत का की राजस्थान,बंगाल मधील केस चा जो पर्यंत निकाल लागत नाही तो पर्यंत .
मणिपूर मधील घटने ला जबाबदार असणाऱ्या लोकांन वर बिलकुल कारवाई ची कोणी अपेक्षा ठेवू नये. मला तर असे वाटते ते दहा बारा गुन्हेगार बदनाम झाले म्हणून त्यांना महिन्याला प्रत्येकी पन्नास हजार मोदी सरकार नी चालू करावेत.
पुरोगामी तर्भे मी मोदी सरकार कडे तशी मागणी करत आहे.
आणि ज्या पीडित आहेत त्यांना तुरुंगात टाकावे.

उदय हा आयडी प्रत्येक धाग्यावर बिल्कीस बानो ची घटना पसरवतो , ते कसं चालत ?
तारतम्य सगळ्यांनी पाळायला नको का ?
आणि भाजपचा विषय निघाला की रामायण महाभारत मधील घटनांचा संदर्भ देवून टिंगल टवाळ्या करणारे भाजप विरोधी आय डी भरपूर आहेत बर का !

फुरोगाम्याचं पण मोदी सारखं आहे. गुजरात म्हटलं की नौखाली म्हणणार, मणिपूर म्हटलं की राजस्थान, तुम्ही का लिहिताय म्हटल की बिल्किस का लिहिताय म्हणणार !! आका तसेच हे काका

आपण दिल्लीच्या गाडीत बसावे आणि ती मद्रासला पोचावी. एकाने व्हाट अबऔटरी चालू केली कि बस.
आता अस करा. की जमल तर पुन्हा मणिपूरला परत चला. बाकी त्याने वासरू मारलं मग मी गाय मारली तर काय ? अस म्हणू नका. इतकेच. बघा बघता बघता मी तुमच्या जाळ्यात फसत चाललो आहे.
अर्थात तुम्हाला पूर्ण लेखन स्वातंत्र्य आहेच. लिहा. काय पाहिजे ते लिहा. देव तुमचे कल्याण करो.

उसके बाद दिल्ली से सिग्नल मिलते ही ईसाई कुकियों और ईसाई नगाओं ने मैती वैष्णव लोगों पर हमला बोल दिया। जिसका जवाब मैतियों दुगुना वेग से दिया >>> हे होत होतं तेव्हा भाजपा शासित राज्य सरकार काय करित होतं? त्यांनी त्वरित कारवाई करायला नको होती का? त्यांनी योग्य ती कारवाई केली असती, कायदा मोडणाऱ्या सर्वांना टाचेखाली आणलं असतं, परिस्थिती नियंत्रणात ठेवली असती तर मैती ना उत्तर देण्यासाठी बाहेर पडावं लागलं नसतं....जर लोक समुदायांना आपआपल्या बळावर सशस्र होउन बळी तो कान पिळी या न्यायाने परस्परांतील वादांचे निकाल लावयचे असतील तर ही लोकशाही, ही शासनव्यवस्था काय कामाची?

ऋन्मेष
तुम्हाला काय म्हणायचय कळल नाही... ते ब्रिटिश जबाबदार आहेत या धिंडीस????

फुरोगामी, मणिपूरमधील घटना कधी घडली? ५ मे.
पहिली अटक कधी झाली? २० जुलै म्हणजे जवळपास ७५ दिवसांनी.
प.बंगालमधील घटना कधी घडली? त्या तारखेपासून ७५ दिवस मोजा आणि तोवर ममताने काही कारवाई केली नाही, तर इथे येऊन सांगा. मग ममतांचा निषेध करून.

{एकूण काय तर पाव वाल्या मुलींना नागड करून फिरवायला काही हरकत नाही. असच ना?}
हा प्रश्न फॉर्वर्ड करणाऱ्याला विचारला का? की त्यांच्या मेसेजला आणखी मोठा ऑडियन्स मिळवून देऊन त्याच्या उद्देशाला हातभार लावला?

भरत.
हा पहा डिलीट केला.
अवांतर
मी जे काय लिहिले होते त्याला व्याजोक्ती म्हणतात. ऋन्मेषनेही त्याच साठी इथे ते फॉरवर्ड इथे टाकले असणार. की पहा लोक काय विचार करतात. तुम्ही त्याला एकदम मनोज कुमार चे पूरब और पश्चिम असा रंग दिलात. आपलच नशीब खोटंं.

ते ब्रिटिश जबाबदार आहेत या धिंडीस????
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नाही
जबाबदार तर जातीधर्मात तेढ वाढवायचे जे गलिच्छ राजकारण खेळले जातेय ते आहे. आणि हे आजचे नाही तर फार जुने मत आहे.

ऋन्मेषनेही त्याच साठी इथे ते फॉरवर्ड इथे टाकले असणार. की पहा लोक काय विचार करतात.
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काय विचार करतात ऐवजी काय विचार पसरवले जातात...

हा सगळा प्रॉब्लेम पंधरा दिवसात सुटू शकेल, पण फक्त ऑस्कर विनर परिधान मंत्री आणि तडीपार यांनी राजकीय इच्छा शक्ती दाखवली पाहिजे. आणि तेही पक्षीय फायदा न पाहता केवळ देशहित लक्षात घेवून.
पण नेमके तेच करायची इच्छाशक्ती नाही ही खरी गोम आहे.

केशवकुल, तुमचा प्रश्न अगदी योग्य आहे. असे मेसेज पाठवणाऱ्यांना असे प्रश्न विचारलेच पाहिजेत.

तो मेसेज साळसूदपणे इथे आल्याने आणखी वेगाने पसरला. आतापर्यंत इथे चार लोकांनी त्या प्रकाराचं अप्रत्यक्ष समर्थन केलंय. पण वाचणाऱ्यांत आणखीही समर्थक असतील. हे चार आणि ते, हा मेसेज इथून उचलून फॉर्वर्ड करतील. आपल्याला त्यांना हातभार लावायचाय का?
मेसेज पाठवणाऱ्यांना प्रश्न विचारणे हे नागरिक, माणूस म्हणून कर्तव्य नाही का?

दुर्दैवाने मी तो व्हिडिओ पहिला अन् राहवले नाही म्हणून लिहिले.
शरम वाटली जगातल्या सर्वात प्रसिद्ध राजकीय नेत्याची. अर्थात सर्वात प्रसिद्ध हे माझे मत नाहीच, पण दिवसागणिक पाच पंनास मेसेज येतात असे.

ओके. ऋन्मेष सर. मला समजल.
तुम्ही आणि मी
हम किस गलीमे आ गये है?
सर, स्टार ट्रेक म्हणून एक माझी आवडती SCI-FI आहे. त्यात काही catch वाक्य आहेत. त्यातले एक आठवले. ते मी तुम्हाला विपु करून सांगेन.

मग आपण सोमय्या आणि मणिपूर vidio का बर त्याची चर्चा करत आहोत? त्यांची तीच इच्छा आहे. तीन माकडे व्हा. बघू नका , ऐकू नका,बोलू नका.

आज ही पोस्ट whatsapp वर आली.<<
टिपीकल बिजेपी IT Cell मेसेज ignored

दुर्दैवाने मी तो व्हिडिओ पहिला अन् राहवले नाही<<
तो व्हिडीओ भयानक आहे, एक स्त्री दुसर्‍या स्त्री सोबत इतके हीन कसे काय वागू शकते.

“I am pleased to see that we have differences. May we together become greater than the sum of both of us.”–

भाजप चे नेते कलंकित आहेत , बलतकर्याना हार तुरे घालतात , महिलांना दुय्यम वागणूक देतात असे आरोप करणारे आसाम मधील काँग्रेसी नेतीच्या शोषण बद्दल , राजस्थान मधील दलीत मुलींच्या अत्याचार बद्दल आणि आता बंगाल मधील घटने बद्दल गार का पडतात >>>>

ते बाकीचे पक्ष, त्यांचे नेते सगळे भिकारचोट आहेत असे वादापुरते समजा. भाजपच्या नेत्यांचे काय? त्यांच्यापेक्षा वेगळे काहीतरी देणार म्हणून निवडून दिले ना? मग निवडून आल्यावर यांचेही लोक तेच करणार आणि पुन्हा त्याबद्दल विचारले तर "मग ते दुसरे लोक काय करतात" हे उत्तर असेल तर भाजपने व समर्थकांनी यापुढे नीतीमत्तेच्या गप्पा मारू नयेत.

भरत यांनी वरती लिहीलेले आहे. अशा घटना घडल्यावर सरकारने त्याबद्दल आवश्यक त्या स्टेप्स घेतल्या का हा प्रश्न आहे. सरकारची सगळी यंत्रणा आहे, सरकारबाहेरही इतकी मोठी संघटना पाठिशी आहे, प्रचंड बहुमत, मोदींना अजूनही लोकांचा असलेला पाठिंबा - इतके सगळे असूनही त्याच त्याच लाजिरवाण्या राजकीय तडजोडी कराव्या लागत असतील तर मग आधीची पन्नास पक्षांची कडबोळी सरकारे काय वाईट होती.

इतक्या भयंकर घटनेवर पहिली प्रतिक्रिया जर 'अमक्या राज्यातल्या घटनेचे काय ?' अशी असेल तर मुळात आपलाच मेंदू विकृत आहे हे मान्य करायला हवे. मागे महाराष्ट्र भूषण मध्ये अनेक लोक हीट स्ट्रोक मध्ये मेले तेव्हाही 'पण इस्लाम चे काय ?' असा प्रश्न उपस्थित करून गाडी भलतीकडे नेली होतीच.

पंप्र या घटनेबद्दल जेमतेम मिनिटभर बोलले, तिथे पण त्यांना छत्तीसगढ व राजस्थान (तेथे निवडणूका येत आहेत) चा उल्लेख करायचा मोह आवरला नाही. नेताच इतका विकृत असेल तर मग समर्थकांकडून काय अपेक्षा ठेवणार?

ट्रोल कडे दुर्लक्ष करूयात का ?

फुरोगामी यांनी मागच्या पानावर दिलेला व्हिडिओ नेहेमीप्रमाणे खोटा आहे. खोटे व्हिडिओ टाकणे व नंतर दिलगिरीही न व्यक्त करणे हे त्यांची नेहेमीची विकृत सवय आहे. मा अ‍ॅड्मिन, त्यांना कृपया समज देण्यात यावी. खरे तर ही दोन वाक्ये लिहावीत इतकीही त्यंची लायकी नाही, पण मायबोली सारखे व्यासपीठ खोटारड्या बातम्यासाठी वापरले जाऊ नये ही सदिच्छा !

ऋनमेष
नी जी फॉरवर्ड पोस्ट केली आहे ती पूर्ण वाचली.
१), ती पोस्ट हिंदी मध्ये ह्याचा अर्थ ही फक्त यूपी ,बिहार
मधील लोकांसाठी आहे त्यांना आरामात उल्लु बनवता येते.
बाकी तमिळ,किंवा कोणत्या ही दक्षिण भाषेत ही बकवास कोणी वाचणार पण नाही.
२) आताच्या समस्या शी ह्या पोस्ट मधील विषयाचा काडी चा संबंध नाही.
३) ही पोस्ट bjp आयटी सेल ची आहे आणि तो लीहणारा पण सुमार बुध्दी मत्तेचा आहे.
म्हणजे जनता खूप मूर्ख आहे ह्याचा bjp ला पूर्ण कॉन्फिडन्स आहे
४) बकवास शिवाय ह्या पोस्ट मध्ये काही नाही.
पण भारतात लोक अजून विचारी नाहीत त्या मुळे अशा पोस्ट चा काही लोकांवर परिणाम होवू शकतो.
पण विचारी लोक असल्या पोस्ट सरळ कचऱ्याच्या डब्यात च टाकतात.
५) जो पर्यंत भारतीय लोक स्वतःच्या बुध्दी नी विचार करण्यास सक्षम होत नाहीत .
तो पर्यंत त्यांच्या वर अन्याय होणारच .
आणि विचारी पना च नसल्या मुळे अन्याय आपल्या वर कोण करत आहे है त्यांच्या लक्षात कधीच येणार नाही.
आणि चुकीचे राज्य करते जनतेला चिरडून टाकणार च.
ऋनमेष सारखा शिक्षित व्यक्ती ची चलबिचल झाली.
म्हणजे शिक्षण आणि शहाणपण ह्या दोन्ही वेगळ्या गोष्टी आहेत.

पुरोगामी ह्या आयडी ला
ल स्वतःचे एक पण मत नाही..हे मी परत परत लिहीत आहे.
त्याचा अर्थ समजून घ्या.
तो आयडी फक्त न फक्त इथे अजेंडा रेटत आहे.

हे आयटी सेल वाले .
बंगाल,राजस्थान किंवा बाकी bjp सत्तेत नसलेल्या राज्यांची नाव घेत आहेत.
ते फक्त सत्य लावण्यासाठी.
ह्या सर्व राज्यात गुन्हेगार गुन्हा घडल्या नंतर काहीच दिवसात पकडले गेलेले आहेत.
कोणत्याच सरकार नी गुन्हेगारांचे समर्थन केलेले नाही.
पण brijbhushan.
पोस्को खाली गुन्हा दाखल आहे अजून अटक नाही.
मणिपूर ७२ दिवस झाले अजून योग्य ती कारवाई नाही.
पुलगामा किती तरी वर्ष झाली अजून आरोपी च पकडले नाहीत.
काँग्रेस कशी ही असू ध्या पण त्यांनी अतिरेकी घटना घडल्या
त्या सर्व लोकांना त्यांनी पकडले आणि फासावर पण चढवले.
Bjp नी फालतुगिरी करण्या पेक्षा मणिपूर मधील गुन्हेगार आणि brijbhushan ह्यांना अटक करून तुरुंगात टाकावे.
आज मोदी चे भाषण ऐकले.
तोच मूर्ख पना.
नेहरू कसे जबाबदार आहेत आज च्या स्थिती ल .bjp नेत्यां न
विषयी अपेक्षा भंगाची तीव्र भावना निर्माण होते आणि त्यांच्या समर्थक लोकांची कीव येते
काँग्रेस योग्य नाही असे लोकांना वाटले म्हणून bjp ला बहुमत दिले ना.
मग अगदी नेहरू न वर आताच्या घडणाऱ्या गुन्ह्याचे खापर का फोडत आहात.
सत्ता आहे ना .
देश चांगला चालवून दाखवा

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