नज़्म

आनंदाचे शेर..

Submitted by Happyanand on 18 December, 2019 - 02:15

आंसूओं के हर कतरे मे
अल्फाजों को भीगा रहा हूं।
हर शाम तेरी
नज़्म का कश लगा रहा हूं।
जिन्दगी है धुआ धुआ
फिर भी अदब से जी रहा हूं।...
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–Anand

शब्दखुणा: 

नज़्म–ए–अल्फ़ाज़ में

Submitted by Happyanand on 17 December, 2019 - 11:31

नज़्म–ए–अल्फ़ाज़ में
मैं तेरी सुरत देख रहा हु।
काफिया बना बना के
मैं तेरी नज़्म लीख रहा हु।....

शब्दखुणा: 
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