॥ श्री उपद्व्याप सूक्तम् ॥

Submitted by Madan Hunkare on 15 July, 2026 - 13:40

डंबडुम्ममाम त्राही मामम
कपाळमोक्षं करंटे गदर्भम
ऑफिस गच्छती, काम न अस्ती,
मिश्रं शाखं भर्जितगोलम चरवती चरवती

टुणुक टुणुक लोंबम शेंडीम
पाकीटं रिकामम, मस्तिष्कं ब्लँकंम
तत्र भार्या क्रोधस्य गर्जती,
रोटिका-ताडन-यंत्रम प्रहारम

ललाटं भंजाळम, तत्र ठणठणामम
सकंडूयनम् सकंडूयनम् टक्कलं पडाम
इत्र तित्र सर्वत्र पळती श्वानम,
भसाभस भुंकती, भीती महानम

झोपम् न आवम, इन्स्टाग्राम रीलम
स्क्रोलं स्क्रोलं, अंगठम ढीलम।
सकाळम जातम्, नयनं लालम,
डंबडुम्ममाम त्राही मामम

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