हैदराबादी बोली हैदराबादी स्वॅग - २

Submitted by स्वानंदी१ on 7 August, 2026 - 05:40

दोस्तों , उधर २००० से भी ज्यादा कमेंटा गिर गई, सो ये नया धागा निकाली मैं.
अभी इधर कु डालो जो भी लिखना है....

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स्वानंदी, किस्सा एक नंबर!
बरीच गॅप झाली. दर शुक्रवारी आठवण येत होती.
अनिंद्य, बिझी आहात का?

सिकंदराबाद रेल्वे स्टेशन पर बहुत भीड थी!
एक पहिलवान अपने दिलचस्प कारनामोंको दिखाकर बेशुमार तालीया बटोर रहा था...
उसका अगला कारनामा था
'निंबू निचोड कारनामा' !

पहिलवान ने पूरी ताकद लगाकर इस कदर निंबू को निचोड डाला, की उसमें रस की एक बूँद भी नहीं बची...
फिर उसने सबको चॅलेंज किया,
"तुममें से अगर कोई इस निंबू से अब एक बूँद भी निकाल कर दिखा देगा, तो मैं पहिलवानी करना छोड दूँगा !"
भीड में से एक दुबलेसे सज्जन निकले, और निंबू हाथ में लेकर उन्होंने एकही नहीं ..पाच बूँदे टपका दी..

ये देखकर पहेलवान पसीना पसीना होकर बोले, "भाईसाब, आप कौन है?.."

साहब बोले, "हम ट्रेन में चना मसाला बेचते है....!"

Lol

जुम्मन की तबीयत नासाज थी, दस दिन से बुखार उप्पर नीचे हो रा था....तो उनो डागतर के पास गये.....
डागतर ने बडी सीरियस शक्ल बनाते हुए कहा की वो सिर्फ बारा घंटे के मेहमान है....शायद सवेरा भी ना देख पाये.........
!!
जुम्मन ने घर पे आकर ये बात दुख के साथ शब्बो को बताई...होर सोचा की ये आखिरी रात है ...बिवी के साथ जरा प्यार से बिताएंगे ....

दोनो ने थोडी देर प्यार से बाते की और बीते लम्हो को याद किया...

फिर शब्बो को सोते हुए देखकर जुम्मन पूछे , 'तुम सो रही हो??'
तो शब्बो बोली,
"क्या करू?... तुम्हे तो कल सुबे उठना नहीं है....
पर मुझे उठना पडेगा न?? "

#Empowered begums

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