Submitted by स्वानंदी१ on 7 August, 2026 - 05:40
दोस्तों , उधर २००० से भी ज्यादा कमेंटा गिर गई, सो ये नया धागा निकाली मैं.
अभी इधर कु डालो जो भी लिखना है....
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ये लो मेरा पहला किस्सा :
ये लो मेरा पहला किस्सा :
बीवी आईसीयू में पड़ी थी, और मियाँ बड़े टेंशन में इधर-उधर चक्कर काट रहे थे।
डॉक्टर बोले, "मियाँ, हम लोग पूरी कोशिश कर रे, लेकिन बेगम कुछ बोल री नई। लगता है कोमा में चली गई।
अब बस अल्लाह पे भरोसा रख्खो..."
मियाँ आँसू पोंछते हुए बोले, "अरे डागतर साब... अभी तो उनो सिर्फ चालीस साल की है..."
इतने में अचानक करिश्मा हो गया...
ईसीजी की लाइन ऊपर नीचे हुइ.... मॉनिटर मे दिल की धड़कन तेज हो गई...
बेगम के होंठ हिले... उँगलियाँ थरथराईं...
और बड़ी मुश्किल से आवाज निकली....
"...छत्तीस... बे मू जले !
'
मस्तच
मस्तच

(No subject)
स्वानंदी,
स्वानंदी,
नवीन धागा काढला हे बरे केलेत, मी भाग २ काढला नसता. 😀
धागा “विनोदी लेखन” मधे ढकलला हे त्याहून बेस्ट. नाहीतरी आपले दोघांचे विनोदी किस्से सोडून बाकी काही घडत नव्हतेच.
मला आता किस्से लिहिण्याचा
मला आता किस्से लिहिण्याचा कंटाळा आलाय, त्यात माझे हैदराबादेतले वास्तव्य, भेटी-गाठी कमी कमी होत आहेत आणि सहाजिकच स्थानीय भाषा, हा गमतीदार लहजा कानावर पडणेही कमी होते आहे.
या नव्या धाग्यावर इथल्या हैदराबादकरांनी आणि हैदराबादी दक्कनी भाषाप्रेमींनी योगदान द्यावे ही अपेक्षा. मी पण येईनच अधून मधून.
अरे असे कसे ?
अरे असे कसे ?
कॅप्टन टीम सोडून नाही जाऊ शकत असे...
अनिंद्य असं करू नका. किस्से
अनिंद्य असं करू नका. किस्से लिहीत जा. तुमचे शुक्रवार स्पेशल किस्से वाचले की 'thank God it's Friday' असं वाटायला लागतं!!
अगदी खरं, अनया आणि धनवंती ...
अनिंद्य
अनिंद्य
काय झाले? कंटाळलात काय?
स्वानंदी
अनिंद्य जशी तुमची इच्छा.
अनिंद्य जशी तुमची इच्छा. तुम्हाला योग्य वाटेल तेच करा.
इतवार कू, दुपेर में, जुम्मन
इतवार कू, दुपेर में, जुम्मन सो रहा था...
अब्बी थोडी देर पहले दोनों में भोत झगडा हुआ क्योंकी शब्बो का भाई हैदराबाद घुमने आने वाला था...होर शब्बो चाहरी की जुम्मन की अम्मी कुछ दिन अपनी बेटी के घर जाए...
जुम्मन का फोन सोफे पे ही पडा था...
तो शब्बो ने उसका फोन खोला...
कुछ नंबर जरा अलग ही तऱ्हेसे सेव्ह कर रख्खे थे..
जैसे..
आँखो का इलाज
दांतोंका इलाज...
दिल का इलाज.....
शब्बो सोच में पड गई..... ये क्या तरीका हुवा नंबर सेव्ह करने का बोलके....
फिर उसने गुस्से से अपना नंबर डायल किया..
तो नाम आया
"ला इलाज!"
हाहाहा.
हाहाहा.
स्वानंदी तुमचे प्रोफाइल पिक भयंकर आवडते मला.
सुंदर आहे ना सामो ? त्या
होय
स्वानंदी तुमचे प्रोफाइल पिक
स्वानंदी तुमचे प्रोफाइल पिक भयंकर आवडते मला. +1
शब्बो: मेरीही गलती है! मुझे
शब्बो: मेरीही गलती है! मुझे किसी समझदार आदमी से शादी करनी चाहिए थी ....
जुम्मन: छोडो ! कोई समझदार आदमी तुमसे कभी शादी नहीं कर सकता.....
शब्बो : बस, मुझे भी यही साबित करना था !!
हौर ये मेरी जानिब से लो एक
हौर ये मेरी जानिब से लो एक खुदलिखा फरेश हैदराबादी किस्सा :
रुखसार बानो एक पहुँचे हुए पीर बाबा कन्ने गए, पीर उन कू पुच्छे:
- क्या नाम है बेटी? क्या कामां करते तुम ?
- रुखसार. सॉफ़्टवेयर कंपनी में इंजीनियर हूँ मई.
- क्या पराबलेम है बोलो - बताव ?
- मेरा शौहर मेरी कोईच बात नै सुनता, क्या करना ?
- बेटी, ये फ़ीचर है, बग नै है 😇
# Gen Z के किस्से
# Hyderabadi Swag
हाहाहा दोन्ही भारी.
हाहाहा दोन्ही भारी.
स्वानंदी आणि अनिंद्य, दोन्ही
स्वानंदी आणि अनिंद्य, दोन्ही किस्से आवडले.
शुक्रवार आला की वाट बघत असते.
(No subject)
^^स्वानंदी आणि अनिंद्य,
^^स्वानंदी आणि अनिंद्य, दोन्ही किस्से आवडले.
शुक्रवार आला की वाट बघत असते.^^
मी पण, मी पण..
दोन्ही किस्से भारी, स्वानंदी
दोन्ही किस्से भारी, स्वानंदी आणि अनिंद्य
GenZ special विशेष आवडला!
(No subject)
दोन्ही किस्से भारी
दोन्ही किस्से भारी

फिचर
फिचर
मेरा लिखा जेन झी किस्सा पसंद
मेरा लिखा जेन झी किस्सा पसंद किए वो सब लोगां कू थँक्यू है 🙏
हैदराबादी कस्टमर :- मेरकू चेक
हैदराबादी कस्टमर :- मेरकू चेक डालना है कब तक क्लियर करते?
बैंकर :- 2 या 3 दिन में क्लियर हो जाता
हैदराबादी :- दोनों बैंक तो आमने-सामने ईच है फिर इतनी देर काईकू?
बैंकर :- सर, प्रोसेजर फॉलो करना पड़ता, अगर आप कब्रिस्तान के बाहर एक्सीडेंट में मर गये, तो आपको घर कू लेके जाते, गुसल देते, कफन पहनाते, जनाजे की नमाज पढ़ते, या फिर मरते ईच सामने के कब्रिस्तान में दफन करते?
हैदराबादी :- ऐसे खतरनाक एक्जांपला नक्को दे रे बाबा, समझ गया मैं
दसां भीक नको पण कुत्रा आवर
दसां
भीक नको पण कुत्रा आवर अशी स्थिती झाली त्या कस्टमरची 
दसां, भारी आहे हा जोक !
दसां, भारी आहे हा जोक !
ये मेरी तरफ से आजका फरेश किस्सा.
फजलू होर हसन ऐसे ही वाता कर रे.
वैसे भी चार मिनार के सामने यार दोस्तोंका अड्डा जमा रैता... तो इनो उनिमेसे है.
हसन पूछे : मैं कबसे सोच रा, ये 'आई लव यू ' की अस्ल क्या होगी ? कहासे आया ये जुमला?....
तो फजलू ने जबाब दिया... यकिनन चायना से ..!
वो कैसे?
फजलू: अरे, ये तो ऐसा ही है ना..?
चले तो चांद तक, नै तो शाम तक.....
तो चायना से ही आया होंगा ना?
न्यूयॉर्कमें, दो भिकारी, एक
न्यूयॉर्कमें, दो भिकारी, एक ॐ का चिन्ह और एक क्रॉस लेकर बैठे थे !
सब लोग ॐ वाले भिखारी को गुस्से से देखकर, क्रॉस पकडे हुए भिखारी को डॉलर की नोट देकर आगे निकल रहे थे .....
कुछ घंटो बाद वहासे एक फादर निकले और उन्होंने ॐ वाले भिकारी से कहा ,
"भाई, ये क्रिश्चन देश है, यहा कोई तुम हिंदुओंको भिख नहीं देगा .....
देखो, लोग तो तुम्हे जलाने के लिये क्रॉस वाले भिकारी को और ज्यादा डॉलर देते जा रहे है...!"
ॐ वाले भिकारी ने क्रॉस वाले भिकारी को देखा और हसते हुए ગુજરાતી में बोला,
'जिग्नेसभाय...?'
..
'बोलो मनसुखभाय..'
.
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"अब ये हमे सिखाएगा , धंदा करना? "
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