एक् दिवस

Submitted by पवन् जैन on 23 October, 2010 - 13:32

खर तर सूर्य उगवतो आणि मावलतो. त्यात नवल अस काय ? कालचा दिवस होता तसाच आजचा आणि तसाच उद्याचाही दिवस उजाड़नार असतो . त्यादिवसाच एवढ कौतुक ते काय करायच ?
पण उजालनारा दिवस जरी सारखाच असला , तरी तो मावलतो तेव्हा रात्रिच्या भयाण, काल्याकुट अंधारात उद्याच्या सोनेरी उष:कालाची स्वप्न माणसाला दुरून खुनाऊ लागलेली असतात!..... मानुस धस्तावल्यासारखा त्या स्वप्नाकडे बघत राहतो. वाटत, पापणी हलवली अणि हे स्वप्न तुटल तर ? पण 'तो' दिवस उजालतो अणि आयुश्यालाच खर्र्या अर्थाने जीवन प्राप्त होतो. तो दिवस ...........त्या दिवसताला तो एक क्षण आपल आयुष्यच बदलून टाकतो!
प्रत्तेकाच्या आयुष्यात एक असा दिवस नक्की उजाडतो की तो दिवस फ़क्त त्याच व्यक्तीसाठी उजाडला होता अस वाटाव!

एक दिवस असा उजाडतो
जगण्याला नवा अर्थ मिळतो !
कुणीच नसलेले आपण
'कुणीतरी' होतो...........
शिखरावरचा आपला आदर्श
पाठीवर हात ठेउन लढ़ म्हणतो.
मनगटात बळ उरल नसताना
आपण लढाई जिंकतो !
अगदी माझ्यासारख .......!!

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