अंताक्षरीचे नियम
१. गाण्याची सुरूवात ही सुरूवातीपासून केली जावी. फक्त सुरूवातीचे आलाप किंवा गुणगुणणे वगळावे. गाण्याचे धृपद पूर्ण लिहीले जावे. धृपद पूर्ण लिहीले नसेल किंवा गाण्याची सुरूवात सुरूवातीपासून केली नसेल तर गाणे बाद धरले जाईल.
२. गाणं त्या पानावरुन वाहून गेल्याशिवाय त्याची पुनरुक्ती करु नये.
३. दोन किंवा अधिक गाणी एकाच वेळी किंवा काही अंतराने पण एकाच अक्षरापासून लिहीली गेली तर सर्वात आधी आलेलं गाणं ग्राह्य धरुन पुढील गाणे लिहावे.
४. अ, आ, ओ सारखे स्वर स्वतंत्रपणे वापरले जावेत अपवाद इ / ई आणि उ / ऊ चा).
५. नवीन गाण्याची सुरूवात आधीच्या गाण्याच्या शेवटच्या अक्षराने किंवा शेवटच्या एक अथवा अधिक शब्दांनीही करता ये_ईल. शेवटचा शब्द घ्यायचा असेल तर तो आहे तसाच घेतला जावा. त्याची रूपे किंवा समानार्थी शब्द घे_ऊ नयेत.
६. हिंदी अंताक्षरीमध्ये शेवटचे अक्षर ह' असेल तर ते गाणे लिहीणार्याने पर्याय देणे अपेक्षित आहे. पर्याय दिल असेल तरी तो घेणे बंधनकारक नाही. पर्याय दिला नसेल तर ह\' पासून किंवा उपांत्य अक्षरापासून गाणे लिहावे.
७. हिंदी अंताक्षरीमध्ये जाये' किंवा जा_ए' आणि तत्सम शब्दांच्या बाबतीत जसे आधीचे गाणे संपले असेल त्याप्रमाणे अंत्य अक्षर धरले जावे.
लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है
लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है
लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है
वही आग सिने मे फिर जल पड़ी है
लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है
प आ
परबतों के पेड़ों पर शाम का
परबतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा हैं
सुरमई उजाला हैं चम्पई अँधेरा हैं
दोनों वक़्त मिलते हैं दो दिल की सूरत से
आसमां ने खुश होकर रंग सा बिखेरा हैं
हरियाला सावन - आन मधले आहे ना
हरियाला सावन - आन मधले आहे ना? माझे फार आवडते गाणे आहे.
पर्बतोंके पेडोंपर - हे सुद्धा. पहाडी रागातले आहे का नकळे पण पर्वतरांगांमधील शांती, वार्याचा आवाज ऐकू येतो हे गाणे ऐकताना.
तुमुल कोलाहल कलह में मैं
// हे गाणे बाद करा. 'र' हे उपांत्य अक्षर आहे. किंवा मग ह च घ्या.
तुमुल कोलाहल कलह में मैं ह्रदय की बात रे मन
विकल होकर नित्य चचंल, खोजती जब नींद के पल,
चेतना थक-सी रही तब, मैं मलय की बात रे मन
चिर-विषाद-विलीन मन की, इस व्यथा के तिमिर-वन की लू
मैं उषा-सी ज्योति-रेखा, कुसुम-विकसित प्रात रे मन
हालचाल ठीक ठाक है
हालचाल ठीक ठाक है
सब कुछ ठीकठाक है
बी.ए. किया है एम.ए. किया
लगता है वो भी ए वै किया
काम नहीं है वरना यहां
आप की दुवा से सब ठीकठाक है
हवाओं में बहेंगे घटाओं में
हवाओं में बहेंगे घटाओं में रहेंगे
तू बरखा मेरी मैं तेरा बादल पिया
जो तेरे ना हुवे तो किसी के ना रहेंगे
दीवानी तू मेरी मैं तेरा पागल पिया
हज़ारों में किसी को तक़दीर ऐसी
मिली है इक राँझा और हीर जैसी
ना जाने ये ज़माना क्यों चाहे रे मिटाना
कलंक नहीं इश्क़ है काजल पिया
पिया तोसे नैना लागे रे
पिया तोसे नैना लागे रे
नैना लागे रे
जाने क्या हो अब आगे रे
नैना लागे रे
पिया ओ हो पिया
पिया का घर है ये
पिया का घर है ये
रानी हूं मै, रानी हूं घर की
मेरे पिया का घर है ये
रानी हूं मै, रानी हूं घर की
अभी आते होंगें अभी आयेंगें वो
मुलाकाते होंगी कई बाते होंगी
रानी हूं मै, रानी हूं घर की..
किताबें बहोत सी पढी होंगी
किताबें बहोत सी पढी होंगी तुमने
मगर कोई चेहरा भी तुमने पढा है?
पढा है मेरी जां नजर से पढा है
बता मेरे चेहरे पे क्या क्या लिखा है
खोया खोया चहंद खुला आसमान
खोया खोया चांद खुला आसमान
ऐसेमे सारी रात जाएगी
तुमको भी कैसे नींद
(ओऽ)
(ओऽ)
नींद न मुझ को आए
दिल मेरा घबराए
चुप के चुप के, कोई आ के,
सोया प्यार जगाए
सोया हुआ संसार है - २
मैं जागूं यहां
तू जागे वहां
एक दिल में दर्द दबाये
दर्द-ए-दिल, दर्द-ए-जिगर. दिल
दर्द-ए-दिल, दर्द-ए-जिगर. दिल में जगाया आपने.
पहले तो मैं शायर था. पहले तो मैं शायर था.
आशिक बनाया आपने.
आप ने याद दिलाया तो मुझे याद
आप ने याद दिलाया तो मुझे याद आया
आप ने याद दिलाया तो मुझे याद आया
के मेरे दिल पे पड़ा था कोई गम का साया
आप ने याद दिलाया
याद तेरी आएगी, मुझ को बड़ा
याद तेरी आएगी, मुझ को बड़ा सताएगी.
मुझ को बड़ा सताएगी. ज़िद ये झूठी
ठंडी हवा ये चांदनी सुहाने
ठंडी हवा ये चांदनी सुहानी
ए मेरे दिल सुना कोई कहानी
नी सुलताना रे
नी सुलताना रे
प्यार का मौसम आया
अरे हाय रे हरी हरी छाया
बोलो न बोलो मुख से गोरी
चूड़ी तुमरी बोले
यहीं सुनके जियरा मेरा डोले
लहरों की तरह यादे
लहरों की तरह यादे
दिल से टकराती है
तूफान उठाती है - २
किस्मत में है
घोर अंधेरे
राते सुलगती
धुंदले सवेरे...
सवेरे वालि गाड़ी से चले
सवेरे वालि गाड़ी से चले जायेंगे
सवेरे वालि गाड़ी से चले जायेंगे
कुछ ले के जायेंगे
हो कुछ दे के जायेंगे
सवेरे वालि गाड़ी से चले जायेंगे
गम की अंधेरी रात में
गम की अंधेरी रात में
दिल को न बेकरार कर
सुबह जरूर आयेगी
सुबह का इंतज़ार कर
दर्द है सारी ज़िंदगी
जिस का कोई सिला नहीं
दिल को फरेब दिजीये
और ये हौसला नहीं -२
उस पे तू बदगुमां न कर
उस पे तो ऐतबार कर
सुबह जरूर आयेगी
सुबह का इंतज़ार कर
गम की अंधेरी...
रंग और नूर की बारात किसे पेश
रंग और नूर की बारात किसे पेश करूं
ये मुरादों की हँसी रात किसे पेश करूं
करूं क्या आंस निरास भयी..
करूं क्या आंस निरास भयी..
दिया बुझे फिर से जल जाये
रात अंधेरी जाये दिन आयें
मिटती आंस है जो सखियन की
समझो गयी तो गयी...
करूं क्या आंस निरास भयी
याद पिया की आये
याद पिया की आये
यै दुःख सहा न जाए राम, हाय राम
बैरी कोयलिया कुक सुनाये रे राम
मुझ बिरहन का जियरा जलाये
हां प्रीत न जाए जगाये हाय राम