संस्कृत सुभाषिते
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| शीर्षक | लेखक | प्रतिसाद | शेवटचा प्रतिसाद | मुख्य चित्र/फोटो |
|---|---|---|---|---|
| सुभाषित आस्वाद [२]:(अ)न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगा: (ब)संदिप्ते भवने तु कूपखननं लेखनाचा धागा | मी-भास्कर | 15 | Jan 14 2017 - 7:54pm |
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| सुभाषित आस्वाद [२]:(अ)न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगा: (ब)संदिप्ते भवने तु कूपखननं लेखनाचा धागा | मी-भास्कर | 15 | Jan 14 2017 - 7:54pm |