धन्य तोची एक | परीटाचा दगड |
मार तो रगड | खात असे ||
अहोरात्र त्यासी | इतरांचे धुणे |
नाही काही उणे | ठावे त्यासी |
इतरांचा मळ | घेई अंगावरी |
कोणा रंगावरी | राग नसे ||
साफ करी सदा | दुसर्याची घाण |
परी त्याचा वाण | साफ असे ||
न कोणी लावीला | शेंदूर तो लाल |
अथवा गुलाल | कधी यासी ||
सदा करी कसा | निष्काम काम |
एकही छदाम | घेत नाही ||
ऐसीच करणी | करी रे मानवा |
सुटेल वाणवा | संसाराची ||
-हरीश दांगट



हरिश

अप्रतिम कविता...
१०० पैकी १०० मार्क
पुलेशु!!!