उड जायेगा हंस अकेला

अर्थान्वयन- उड जायेगा हंस अकेला !

Submitted by चैतन्य दीक्षित on 26 April, 2016 - 06:44

उड़ जाएगा हंस अकेला।
जग दर्शन का मेला ।। धृ ।।
जैसे पात गिरे तरुवर के ।
मिलना बहुत दुहेला ।
ना जानू किधर गिरेगा ।
लग्या पवन का रेला ।। 1 ।।
जब होवे उमर पूरी ।
जब छूटेगा हुकुम हुजूरी ।
जम के दूत बड़े मजबूत ।
जम से पड़ा झमेला ।।2 ।।
दास कबीर हर के गुण गावे ।
वा हर को पार न पावे ।
गुरु की करनी गुरु जाएगा ।
चेले की करनी चेला ।। 3 ।।

- तसं समजायला सोपं असं हे निर्गुणी भजन.

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