भन्नाट आणि हटके - चित्रपट गीते

Submitted by अर्चना सरकार on 1 December, 2016 - 12:09

काल मी यूट्यूबवर राजवाडे अ‍ॅन्ड सन्स पाहिला. त्यातील तगमग गाणे पुन्हा त्याच्या शब्दांसाठी आवडले.

म्युजिकल बीट्स सोबत गाणे ऐकल्याशिवाय या शब्दांतील मजा नाही कळणार म्हणून लिंक देते - https://www.youtube.com/watch?v=gWJX1xnkgyQ

अंधारात डोळे उघडून केली मी पहाट
अन धूम धावत जाता जाता फुटली वाट
आभाळ भरून स्वप्न पाहिले मी आज
अन पंख लावून त्यात मी उडले सुसाट
उडता उडता केले हवे तसे हातवारे
निखळून पडताना झेलले मी चंद्र तारे
ठिणग्या उडवत एकमेकावर घासले
तेवत ठेवत माझ्या मनातील धग
तगमग तगमग
तगमग तगमग
अफाट Happy
असे शब्द आणि कल्पना सुचणार्‍याला हॅटस ऑफ !

ईथे अशीच आपल्या आवडीची भन्नाट आणि नेहमीपेक्षा जरा हटके शब्द रचना असलेली गीते शेअर करूया. नवी जुनी, ईतर भाषेतीलही चालतील. जमेल तसे शब्द लिहीत, गाणे तालासूरात ऐकायला यूट्यूब लिंकही शेअर करूया Happy

या पोस्टची लांबी आटोक्यात ठेवायला माझी बाकीची आवडीची या टाईपची गाणी मी प्रतिसादांत देते.

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आओ ट्विस्ट करे
जाग उठा मौसम
हे s s s आओ ट्विस्ट करे
जिंदगी है यही

गायक : मन्ना डे
चित्रपट : भुत बंगला (१९६५)
संगित : आर डी बर्मन
गीतकार : हसरत जयपुरी
कलाकार : मेहमूद, अमिन सयानी, तनुजा, मोहन चोटी

बम बम बोले (तारे जमीन पर)
- प्रसून जोशी

https://www.youtube.com/watch?v=NJ1NIIdHhXs

चका राका ची चाय चो चका लो रूम
गंदो वंदो लाका राका तुम
अक्को तकको इड्डी गिद्दी गिद्दी गो
इड्डी पी विदि पी चिकि चका चो

गीली गीली मॉल सुलू सुलू मॉल
मका नका हुकू बुकू रे
तुकु बुकू रे चका लाका
बिक्को चिक्को सिली सिली सिली गो
बगड़ दम चगद दम चिकि चका चो

देखो देखो क्या वो पेड़ है, चादर ओढ़े, या खड़ा कोई -2
बारिश है या, आसमान ने छोड़ दिए है नल खुले कहीं
हो हम देखे यह जहां वैसे ही जैसे नज़र अपनी
खुलके सोचो आओ, पंख जरा फैलाओ
रंग नए बिखराओ, चलो चलो चलो चलो नए ख्वाब बुनले
सा प्-2 ध रे-2 गा रे-2 गा माँ प् सा
बम बम बम, बम बम बम बोले
हे बुम्चिक बोले, अरे मस्ती में डोले
(बम बम बोले, मस्ती में डोले
बम बम बोले, मस्ती में तू डोल रे) -2

भला मछलियाँ भी क्यूँ उड़ती नहीं, ऐसे भी सोचो ना
सोचो सूरज रोज नहाए या, बाल भिगोके यह बुध्धू बनाए हमें
ये सारे तारे तिम तिमाये, या फिर गुस्से में कुछ बडबडाते रहे
खुलके सोचो आओ, पंख जरा फैलाओ
रंग नए बिखराओ, चलो चलो चलो चलो नए खाब बुनले
ये ये ये ये ये…..
बम बम बोले, मस्ती में डोले
बम बम बोले, मस्ती में तू डोल रे

ओ रट रटके क्यूँ टंकर फुल, टंकर फुल, टंकर फुल
आँखें बंद तो डब्बा गुल, डब्बा गुल, डब्बा गुल
ओ बंद दरवाजे खोल रे, खोल रे, खोल रे, खोल रे
ओ जा बिन्दास बोल रे, बोल, बोल, बोल, बोल रे
मैं भी हूँ, तू भी है
मैं भी, तू भी, हम सब मिलके
बुम्चिक बम – 8 बम बम बम बम…..
बम बम बोले, मस्ती में डोले
बम बम बोले, मस्ती में तू डोल रे

ऐसी रंगोभारी अपनी दुनिया है क्यूँ, सोचो तो सोचो ना
प्यार से चुनके इन् रंगों को, किसीने सजाया यह संसार है
जो इतनी सुन्दर है अपनी दुनिया, उपरवाला क्या कोई कलाकार है
खुलके सोचो आओ, पंख जरा फैलाओ
रंग नए बिखराओ, चलो चलो चलो चलो नए खाब बुनले
(बम बम बोले, मस्ती में डोले
बम बम बोले, मस्ती में तू डोल रे) -4
ओ बम बम बोले

स्वदेस
https://www.youtube.com/watch?v=tGpd1V8YYT0

ये जो देस है तेरा, स्वदेस है तेरा
तुझे है पुकारा
ये वो बंधन है जो कभी टूट नहीं सकता

मिट्टी की है जो ख़ुश्बू, तू कैसे भुलायेगा
तू चाहे कहीं जाये, तू लौट के आयेगा
नई-नई राहों में, दबी-दबी आहों में
खोये-खोये दिल से तेरे कोई ये कहेगा
ये जो देस...

तुझसे ज़िंदगी, है ये कह रही
सब तो पा लिया, अब है क्या कमी
यूँ तो सारे सुख हैं बरसे
पर दूर तू है अपने घर से
Sad
आ लौट चल तू अब दिवाने
जहाँ कोई तो तुझे अपना माने
आवाज़ दे तुझे बुलाने
वही देस
ये जो देस...

ये पल हैं वही, जिसमें हैं छुपी
पूरी इक सदी, सारी ज़िंदगी
तू न पूछ रास्ते में काहे
आये हैं इस तरह दो राहे
तू ही तो है राह जो सुझाये
तू ही तो है अब जो ये बताये
जाएं तो किस दिशा में जाये
वही देस
ये जो देस...

क्या मजार तेरी मर्जी के आगे बंदो की चल जायेगी ...
ताने ऊंगली जो तू कटपुतलीयोकी ..चाल ये बदल जायेगी ..जायेगी ..
हाँ रहम हाँ रहम फर्मा ऐ खुदा .. ऐ खुदा
मेहफूज़ हर कदम करना ए खुदा .. ऐ खुदा .. --- आमीर फिल्म

गर माझी सारे साथ में
गैर हो भी जायें
तो खुद ही तो पतवार बन
पार होंगे हम..
किनारे, किनारे...

जो छोटी सी हर इक नहर
सागर बन भी जाये
कोई तिनका लेके हाथ में
ढूंढ लेंगे हम किनारे...
किनारे, किनारे... -- क्वीन फिल्म

बारिश

नहरो में मचलती है
कुएँ पोखर से मिलती है
खपरालो पर गिरती है
गलियों में फिरती है
मोड़ पर संभलती है
फिर आगे निकलती है
वही बारिश, यह बारिश अक्सर गीली होती है
इसे पानी भी कहते है
उर्दू में आब
मराठी में पानी
तमिल में तन्नी
कन्नड़ में नीर और बांग्ला में जोल कहते है
संस्कृत में जिसे वारी नीर अमृत पाए अंबु भी कहते है
ग्रीक में इसे आक्वा पूरा
अँग्रेज़ी में इससे वॉटर भी कहते है
फ्रेंच में औऊ
और केमिस्ट्री में H20 कहते है
यह पानी आँख से ढलता है तो आँसू कहलाता है
लेकिन चेहरे पे चाड जाए तो रुबाब बन जाता है
कोई शर्म से पानी पानी हो जाता है
और कभी कभी यह पानी सरकारी फाइल’ओ में अपने कुएँ समेत चोरी हो जाता है
पानी तो पानी है पानी ज़िंदगानी है
इसीलिए जब रूह की नदी सुखी हो
मन का हिरण प्यासा हो
दिमाग़ में लगी हो आग
और प्यार की गागर खाली हो तब मे हमेशा यह बारिश नाम का गीला पानी लेने की राय देता हूँ
-- थोडा सा रुमानी हो जाये फिल्म

बाजूच्या एका धाग्यावर रेहमानच्या चर्चेवरून एक आवडीचे चित्रपत गीत आठवले.. ते
त्यातील आवड्ते कडवे , ओळी..

..

समझो ईस पहेली को,
बूंद हो अकेली तो
एक बूंद जैसे कुछ भी नही....
हम औरोंको छोडे तो,
मूंह सब से ही मोडे तो
तनहा रह ना जाये देखो हम कही....
क्यों ना बने मिलके हम धारा.. धारा.. तारा..
येह तारा वोह तारा हर तारा..
देखो जिसे भी लगे प्यारा Happy

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