गुलमोहर - गेल्या ७२ तासातील लेखन : काव्यलेखन

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वेडा मुग्गा, शाना मुग्गा ... (वेडी मुग्गी, शानी मुग्गी..) पुरंदरे शशांक 50 21 August, 2017 - 13:13
घडीभर टेकण्यालायक तरी सध्या करू घर बेफ़िकीर 6 21 August, 2017 - 11:53
ती गझल- 06 जुलै 2017 बेफ़िकीर 5 21 August, 2017 - 10:36
वदनि पेग घेता .... चामुंडराय 5 21 August, 2017 - 10:21
'गुलज़ार' सत्यजित... 5 21 August, 2017 - 08:49
मांडतो आहे नव्याने... सत्यजित... 11 21 August, 2017 - 08:31
पाउस मीरा बावनकर 2 21 August, 2017 - 07:37
वेदनेचे बाळ... राजेंद्र देवी 4 21 August, 2017 - 07:23
आषाढ तळ ना आई दत्तात्रय साळुंके 1 21 August, 2017 - 04:39
माझं झोपडं गळाय लागलं र।हुल 7 21 August, 2017 - 03:55
झिंगलेला पाऊस दत्तात्रय साळुंके 7 21 August, 2017 - 01:22
मग्रूरी तुझी मोडतो आहे दत्तात्रय साळुंके 7 21 August, 2017 - 01:18
मी म्हणालो तीला अक्षय दुधाळ 11 20 August, 2017 - 23:48
काय झालय मला काही कळत नाही मंगेश.... 6 20 August, 2017 - 22:19
शापित जीणं र।हुल 5 19 August, 2017 - 14:50
ंमीच का ...? मिरिंडा 4 19 August, 2017 - 11:55
खड्डा अतुलअस्मिता 1 19 August, 2017 - 11:54
..........पापनिष्ठ ? मिरिंडा 4 19 August, 2017 - 11:51
निसटलेले क्षण र।हुल 3 19 August, 2017 - 05:05